दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का नया अध्याय शुरू हो गया है। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराया। नतीजे आने के बाद पूर्व गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट जारी की, जिसमें उन्होंने आशुतोष तिवारी से किसी भी मतभेद की अटकलों को खारिज किया।
नरोत्तम मिश्रा ने लिखा कि उनके और आशुतोष तिवारी के बीच कोई मतभेद नहीं है। उन्होंने आशुतोष को अपना अनुज बताया और कहा कि दोनों के बीच करीब 25 वर्षों का पारिवारिक रिश्ता है। नरोत्तम मिश्रा ने आशुतोष तिवारी को कर्मठ, समर्पित और मेहनती कार्यकर्ता करार दिया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और अपने समर्थकों से अपील की कि वे ऐसा कोई बयान या आचरण न करें जिससे संगठन या आशुतोष तिवारी को नुकसान पहुंचे। उन्होंने कहा कि राजनीति में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन परिवार, संस्कार और रिश्ते हमेशा बने रहने चाहिए।
इस पोस्ट पर कांग्रेस ने तीखा पलटवार किया। कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. विक्रम चौधरी ने कहा कि दतिया में संगठन से जुड़े अधिकांश पदाधिकारी नरोत्तम मिश्रा की अनुशंसा पर ही बनाए गए थे। हार के बाद जिन लोगों पर कार्रवाई हुई, उनमें से ज्यादातर नरोत्तम मिश्रा से जुड़े थे। ऐसे में हार की जिम्मेदारी तय करते समय उन्हें अलग नहीं रखा जा सकता।

डॉ. विक्रम चौधरी ने आरोप लगाया कि भाजपा केवल छोटे स्तर के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों पर कार्रवाई करती है, जबकि बड़े नेताओं को बचाया जाता है। उन्होंने नरोत्तम मिश्रा पर कटाक्ष करते हुए कहा — “नरोत्तम मिश्रा ही जयचंद है।”
याद रहे कि जयचंद शब्द भारतीय इतिहास में विश्वासघात के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल होता है। इससे पहले 2021 में दमोह उपचुनाव हार के बाद खुद नरोत्तम मिश्रा ने अपनी पार्टी के कुछ लोगों को “जयचंद” कहकर जिम्मेदार ठहराया था। अब कांग्रेस ने उसी शब्द को उनके खिलाफ इस्तेमाल किया है।
दतिया उपचुनाव शुरू से ही विवादों में रहा। भाजपा ने पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। टिकट न मिलने पर नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किए, हाईवे जाम किया और कई पदाधिकारियों ने इस्तीफे दिए। बाद में नरोत्तम मिश्रा ने आशुतोष तिवारी के समर्थन में प्रचार किया और मंच पर भावुक भी हुए। फिर भी पार्टी इस सीट को वापस नहीं जीत सकी।
हार के बाद भाजपा में आंतरिक समीक्षा चल रही है। कई नेताओं का आरोप है कि नरोत्तम मिश्रा के कुछ समर्थकों ने अंतिम दिनों में सही तरीके से काम नहीं किया। वहीं नरोत्तम मिश्रा ने साफ कहा है कि आशुतोष तिवारी उनके अनुज हैं और दोनों के बीच कोई कटुता नहीं रही।
कांग्रेस इस जीत को भाजपा की आंतरिक फूट और संगठनात्मक कमजोरी का नतीजा बता रही है। भाजपा अभी चुप है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि दतिया हार का ठीकरा किसके सिर फोड़ा जाएगा।
(नोट: यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक खबरों और नरोत्तम मिश्रा की सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है।)
























































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