शिवराज सिंह चौहान मानहानि केस से दोषमुक्त, वीडी शर्मा और भूपेंद्र सिंह को भी कोर्ट से राहत… See More and Follow us

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भोपाल/नई दिल्ली : केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को मानहानि केस में बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और सीनियर एडवोकेट विवेक तन्खा के साथ आपसी समझौते के बाद तन्खा ने शिवराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के खिलाफ दायर आपराधिक व सिविल दोनों मानहानि के मामलों को वापस ले लिया है। कोर्ट ने सभी लंबित विवादों का निस्तारण कर दिया है।
यह मामला 2021 के पंचायत चुनावों के दौरान ओबीसी आरक्षण को लेकर उठे विवाद से जुड़ा था। विवेक तन्खा ने आरोप लगाया था कि शिवराज सिंह चौहान, वीडी शर्मा और भूपेंद्र सिंह ने उनके खिलाफ समन्वित, झूठा और मानहानिकारक अभियान चलाया, जिसमें उन्हें ओबीसी आरक्षण का विरोधी बताया गया। तन्खा ने जबलपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में 10 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग करते हुए परिवाद दायर किया था।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2024 में इन नेताओं की याचिका खारिज कर दी थी और निचली अदालत में बयान दर्ज कराने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने बेलेबल वारंट पर रोक लगाई और व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी। अंततः दोनों पक्षों की संसद में मुलाकात के बाद समझौता हो गया। सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने कोर्ट को बताया कि “दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से विवाद सुलझा लिया है।”
सुप्रीम कोर्ट का फैसला:
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने समझौते को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि सभी पेंडिंग डिस्प्यूट समाप्त हो गए हैं। अब शिवराज सिंह चौहान, वीडी शर्मा और भूपेंद्र सिंह पर कोई कानूनी कार्यवाही नहीं चलेगी।
शिवराज सिंह चौहान का बयान:
“राजनीति में मतभेद होते हैं, लेकिन बड़े दिल से समाधान निकाला जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सभी के लिए अच्छा है।”
विवेक तन्खा ने सोशल मीडिया पर लिखा:
“सब केस खत्म! पब्लिक लाइफ में बड़ा दिल रखना चाहिए। शिवराज जी के साथ संसद में अच्छी मुलाकात हुई।”
यह फैसला मध्य प्रदेश की राजनीति में सकारात्मक संदेश दे रहा है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के प्रति सम्मान व्यक्त किया है। अब यह मामला पूरी तरह से बंद हो गया है।
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विवेचना :

जबलपुर की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा सांसद वीडी शर्मा और विधायक भूपेंद्र सिंह को मानहानि मामले से दोषमुक्त कर दिया है। यह फैसला कांग्रेस सांसद विवेक कृष्ण तंखा द्वारा दायर मामले के वापस लिए जाने के बाद आया, जो 2021 के ओबीसी आरक्षण विवाद से जुड़ा था।

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मामले का पृष्ठभूमियह विवाद 2021 के मध्य प्रदेश पंचायत चुनावों के दौरान ओबीसी आरक्षण को लेकर उत्पन्न हुआ था। विवेक तंखा ने आरोप लगाया कि शिवराज सिंह चौहान और अन्य नेताओं के बयानों से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा, जिसके बाद उन्होंने सिविल और आपराधिक मानहानि के मामले दायर किए थे। सिविल मामले में 10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग भी की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट की भूमिका:

मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां अदालत ने दोनों पक्षों को समझौते की सलाह दी। दिल्ली में संसद भवन परिसर में हुई बातचीत के बाद तंखा ने सभी मानहानि मामले वापस लेने का फैसला किया। सुप्रीम कोर्ट ने इस समझौते को रिकॉर्ड पर लिया और निचली अदालत को निर्देश दिए।

अदालत का अंतिम फैसला:

जबलपुर कोर्ट में सुनवाई के दौरान तंखा के वकील सोम मिश्रा ने प्रार्थना पत्र देकर मामले को वापस लेने की जानकारी दी। बचाव पक्ष के वकील श्याम विश्वकर्मा की मौजूदगी में अदालत ने आवेदन स्वीकार कर तीनों नेताओं को दोषमुक्त घोषित किया। यह फैसला 10 मार्च 2026 को सुनाया गया।

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