पणजी/वास्को: बॉम्बे हाई कोर्ट ने गोवा में मोर्मुगाओ पोर्ट अथॉरिटी (MPA) की भूमि पर छत्रपति शिवाजी महाराज की अनधिकृत प्रतिमा स्थापित करने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने बुधवार को दक्षिण गोवा के पुलिस अधीक्षक (SP) और मोर्मुगाओ म्युनिसिपल काउंसिल (MMC) के मुख्य अधिकारी को 10 मार्च तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें MPA की शिकायत पर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं, इसकी जानकारी दी जाए।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया, “क्या कोई व्यक्ति भूमि पर अतिक्रमण कर प्रतिमा लगा सकता है?” यह मामला MPA की उस याचिका से जुड़ा है जिसमें दावा किया गया है कि वास्को द गामा के साडा जंक्शन के पास पोर्ट की सार्वजनिक भूमि (चालता नंबर 42, पीटी शीट नंबर 30) पर बिना किसी अनुमति के छत्रपति शिवाजी महाराज की घोड़े पर सवार प्रतिमा स्थापित की गई है। MPA ने फरवरी 2026 की शुरुआत में ही इसकी शिकायत की थी और हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर कर प्रतिमा को तत्काल हटाने, आगे कोई निर्माण कार्य न होने देने और अतिक्रमण को रोकने की मांग की है।
याचिका में MPA ने तर्क दिया है कि यह भूमि ‘पब्लिक प्रीमिसेज’ के अंतर्गत आती है और पब्लिक प्रीमिसेज (इवेक्शन ऑफ अनऑथराइज्ड ऑक्यूपेंट्स) एक्ट, 1971 के तहत यह अतिक्रमण संज्ञेय अपराध है। पोर्ट अथॉरिटी ने बताया कि 16 फरवरी 2026 को उन्हें पता चला कि अज्ञात व्यक्तियों ने भूमि पर अतिक्रमण कर प्रतिमा लगाई और आसपास की सफाई-समतलीकरण का काम जारी रखा।
फिलहाल प्रतिमा निर्माणाधीन है और उसके चारों ओर स्कैफोल्डिंग लगी हुई है। तस्वीरों में देखा जा सकता है कि प्रतिमा बंदरगाह के नजदीक, समुद्र और जहाजों की पृष्ठभूमि में खड़ी है, जहां कुछ लोग और अधिकारी मौजूद हैं।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च को निर्धारित की है, जब संबंधित अधिकारियों के हलफनामों की समीक्षा की जाएगी। यह मामला गोवा में भूमि अतिक्रमण और सांस्कृतिक प्रतीकों के स्थापना से जुड़े विवादों को फिर से चर्चा में ला रहा है, जहां एक तरफ शिवाजी महाराज के प्रति सम्मान है, वहीं दूसरी तरफ कानूनी प्रक्रिया और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा का सवाल है।
फैंस और स्थानीय लोग इस मुद्दे पर अलग-अलग राय रखते हैं, लेकिन कोर्ट का फैसला अंतिम होगा।
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