मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी (MPMSU), जबलपुर में CAG रिपोर्ट ने बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा किया है। यह प्रदेश की एकमात्र मेडिकल यूनिवर्सिटी है, जो मेडिकल, नर्सिंग, पैरामेडिकल और अन्य संबंधित कोर्सेज की शिक्षा और संबद्धता का काम देखती है।
प्रभावी हेडलाइन:
CAG रिपोर्ट में हड़कंप: जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी में 55 करोड़ की अनियमितता!
मध्य प्रदेश की एकमात्र मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी (MPMSU), जबलपुर में Comptroller and Auditor General (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट ने गंभीर खुलासे किए हैं। रिपोर्ट 2020-21 से 2022-23 तक की अवधि पर आधारित है और विधानसभा में पेश की गई।

मुख्य खुलासे:
यूनिवर्सिटी ने नियमों का उल्लंघन करते हुए कुल 55.52 करोड़ रुपये दो मेडिकल कॉलेजों को ट्रांसफर किए। इसमें 39.69 करोड़ इंदौर के MGM मेडिकल कॉलेज को नेत्र विज्ञान (Ophthalmology) स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के लिए और 15.83 करोड़ जबलपुर मेडिकल कॉलेज को न्यूरोसर्जरी सुविधा के लिए दिए गए।
नियमों के अनुसार, यूनिवर्सिटी फंड्स केवल संबद्ध संस्थानों को ही मेंटेनेंस या अन्य कार्यों के लिए दिए जा सकते हैं, लेकिन ये कॉलेज ठीक से संबद्ध नहीं थे या नियमों का पालन नहीं हुआ।
CAG ने इन फंड्स की रिकवरी का निर्देश दिया है।
अन्य गड़बड़ियां: यूनिवर्सिटी ने 551 कॉलेजों से 98.60 करोड़ का एंडोमेंट फंड नहीं वसूला, स्टाफ की भारी कमी (184 पद खाली), एग्जामिनेशन में देरी, GST नहीं वसूला, और कई कॉलेजों में बुनियादी ढांचे की कमी के बावजूद संबद्धता दी गई।
इससे हजारों मेडिकल, नर्सिंग और पैरामेडिकल छात्रों की पढ़ाई और परीक्षाएं प्रभावित हो रही हैं। मीडिया ने पहले भी ऐसी अनियमितताओं को उजागर किया था, जिसकी अब CAG ने पुष्टि कर दी है।
प्रशासन से सवाल: कब तक चलेगी ऐसी मनमानी? छात्रों और मरीजों का क्या होगा?
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